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Hariyali Amavasya | हरियाली अमावस्या व्रत, पूजा विधि और महत्व

Table of Contents

हरियाली अमावस्या का परिचय
Introduction of Hariyali Amavasya

हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। श्रावण मास भगवान शिव और पार्वती को समर्पित मास है। इस महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। इस महीने से अगले चार महीनों तक व्रत, त्यौहारों का सिलसिला जारी रहता है।

पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास में कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या रहती है। यह एक अंधेरी रात होती है क्योंकि अमावस्या वाले दिन आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता है। सावन के महीने में आने वाली अमावस्या का अपना अलग ही महत्व है इस दिन आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) के नाम से जानते हैं।

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Hariyali Amavasya

वर्षा ऋतु में आने के कारण श्रावण मास की इस अमावस्या के दिन धरती पर चारों ओर हरियाली छाई रहती है। इस दिन वृक्षारोपण करने का महत्व है। हरियाली अमावस्या पर मान्यता है कि इस दिन तुलसी एवं पीपल के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए, इससे मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

हरियाली अमावस्या 2021 में कब मनाई जाएगी? 
When will Hariyali Amavasya be celebrated in 2021?

इस बार वर्ष 2021 में हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) रविवार, 8 अगस्त को मनाई जाएगी।
7 अगस्त को चतुर्दर्शी होने के कारण यह दर्शी अमावस्या मानी जायेगी।

हरियाली अमावस्या कितने बजे है? 
What time is Hariyali Amavasya?

अमावस्या तिथि प्रारम्भ –
अगस्त 07, 2021 को शाम 07:11 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त –
अगस्त 08, 2021 को शाम 07:19 बजे तक है।

पूजा विधि 

हरियाली अमावस्या की सुबह स्नान आदि करके वृक्षारोपण करने से भगवान विष्णु और अनन्त की अति कृपा रहती है। दोपहर में गंगा आदि तीर्थस्नान करके पितृ ओर देव ऋषि तर्पण करने से पितरों की असीम अनुकम्पा रहती है। संध्या काल में ईशान कोण में स्वस्तिक चिन्ह पर घी का दीपक जलाने से मॉ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और वर्ष भर कुबेर भगवान कृपा बनाये रखते है।

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हरियाली अमावस्या को किस नाम से जाना जाता है?
By What Name is Hariyali Amavasya known?

इस अमावस्या को राजस्थान, उत्तर प्रदेश व आसपास के क्षेत्र में हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) के नाम से जानते हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र में इसे गटारी अमावस्या कहते हैं।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में चुक्कला एवं उड़ीसा में चितलागी अमावस्या नाम से प्रसिद्ध है।

हरियाली अमावस्या को आदि अमावस्या और श्रावणी अमावस्या भी कहते हैं।

राजस्थान में हरियाली अमावस्या मनाने का तरीका –
Ways to celebrate Hariyali Amavasya in Rajasthan

इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य वातावरण को हराभरा रखना है। राजस्थान में हरियाली अमावस्या बहुत ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। खासकर यह जयपुर, उदयपुर में तो विशेष तैयारियों के साथ मनाया जाता है। जयपुर शहर में इस दिन मेले का आयोजन होता है और वहां छोटी छोटी दुकानें लगती हैं जिनमे महिलाएं खरीददारी करती हैं। बच्चों के लिए खिलौनों व मिठाई की दुकान लगती है। इस त्यौहार जयपुर में स्वादिष्ट घेवर मिलते है, जिन्हें सभी बड़े ही चाव के साथ खाते हैं।

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उदयपुर में भी इसी तरह के मेलों का आयोजन होता है जिसमें अनेकों प्रकार की क्रीड़ा प्रतियोगिताएं, लोक नृत्य आदि आयोजित किए जाते हैं। देश विदेश से बहुत से पर्यटक उदयपुर के मेले को देखने सावन के महीने में जाते है। इसके अलावा इस मेले में वृक्षारोपण का भी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

हरियाली अमावस्या का क्या महत्व है?
What is the significance of Hariyali Amavasya?

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलमणि शास्त्री (Astrologer Pt. Neelmani Shastri) ने बताया कि प्रत्येक अमावस्या के दिन पितरों को भोग लगाया जाता है और उनका तर्पण किया जाता है। इस दिन पितरों की शांति हेतु भी अनुष्ठान किए जाते हैं।

इस अमावस्या के दिन पौधारोपण करने का विशेष महत्व बताया गया है। पृथ्वी पर रहने वाले समस्त प्राणी हरी भरी प्रकृति के इस विहंगमय दृश्य का आनंद प्राप्त करके प्रसन्न होते हैं।

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वृक्षारोपण के अलावा हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) पर तुलसी एवं पीपल के वृक्ष की पूजा करने का भी विशेष महत्व है ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। क्योंकि पीपल के वृक्ष में नारायण वास माना जाता है।

हरियाली अमावस्या क्यों मनाई जाती है?
Why is Hariyali Amavasya celebrated?

श्रावण मास की अमावस्या होने के कारण पृथ्वी पर चहुं ओर हरियाली पसरी रहती होती है, इस कारण इसे हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या के दिन पौधारोपण करने का विशेष महत्व बताया गया है। पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्य, जीव जंतु, पशु पक्षी आदि सभी प्रकृति के इस भव्य सुंदरता का आनंद प्राप्त करके हर्षित होते हैं।

हरियाली अमावस्या का मुख्य उद्देश्य प्रकृति की सुन्दरता और इसके स्वरूप को मनुष्य के साथ जोड़ना है। लोगों में प्रकृति की हरियाली के प्रति जागरूकता पैदा करना और वृक्षारोपण करना है। इस दिन लोगों से वृक्षारोपण करने का आग्रह किया जाता है। शास्त्रानुसार ऐसा माना गया है कि एक पेड़ लगाने से दस पुत्रों के समान सुख की प्राप्ति होती है। अमावस्या के दिन पितरों के पिंड दान व उनके तर्पण के माना गया है। हिन्दू धर्म में अपने पूर्वज, पितरों का इस दिन स्मरण किया जाता है और पवित्र नदी में स्नान करके, दान पुण्य व पिंडदान का रिवाज है।

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हरियाली अमावस्या पर धार्मिक कार्य
Religious work on Hariyali Amavasya

हरियाली अमावस्या के दिन मुख्य रूप से भगवान शिव की आराधना की जाती है तथा जलाभिषेक किया जाता है। उनसे अच्छी फसल के लिए अच्छी वर्षा या मानसून के लिए प्रार्थना करते है।

ज्योतिषाचार्य पं. नीलमणि शास्त्री ने बताया कि भगवान श्री विष्णु का पीपल के वृक्ष में वास माना जाता है, इसलिए पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

अमावस्या के दिन पितरों को पिंडदान तथा जल अर्पित किया जाता है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा जो पितृ आत्माएं पृथ्वी पर दोष के कारण भटक रही है उन्हें शांति प्राप्त होने की कामना की जाती है।

हरियाली अमावस्या के दिन क्या करें?
What to do on Hariyali Amavasya?

हरियाली अमावस्या के दिन दान दक्षिणा, पूजा पाठ, गरीबों को भोजन, वृक्षारोपण आदि कार्य किए जाने चाहिए। इसके अलावा तुलसी के पौधे व भगवान विष्णु के रूप में पीपल के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए।

घर के आंगन में तुलसी के नए पौधों का रोपण करना चाहिए।

अमावस्या के दिन विधि विधान से पूजा-अर्चना आदि करते हैं तथा विशेष तौर पर पितरों को जल अर्पित किया जाता है तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है।

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अमावस्या को प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत होकर सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए
तथा चावल की खीर, पुआ, पूरी, सब्जी, पकवान आदि बनाकर अपने पितरों को भोग लगाना चाहिए।
अमावस्या के दिन ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देना तथा वस्त्र भेंट करना चाहिए।
इस दिन गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए।

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हरियाली अमावस्या पर किस कार्य के लिए कौनसा वृक्ष लगाएं?
Which Tree Should be Planted for which Purpose on Hariyali Amavasya?

हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण सबसे महत्वपूर्ण है।

तो जानते है कि किस वृक्ष के रोपण से क्या फल की प्राप्ति होगी।

वेदों के अनुसार आरोग्य प्राप्ति के लिए नीम व तुलसी का पेड़ लगाना चाहिए।
घर की सुख शांति के लिए तुलसी का पौधारोपण घर के आंगन में करना चाहिए।
संतान प्राप्ति के लिए केले का वृक्ष लगाना चाहिए।
आंवले का पौधा रोपण करने से धन संपदा में वृद्धि होती है।

सर्पदोष, शनि की महादशा, पितृ दोष आदि से दुखी व्यक्ति को हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक व पुष्प अर्पित करना चाहिए। श्रावण मास को भगवान शिव का महीना माना जाता है इस महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से शिव भगवान प्रसन्न रहते हैं। इसीलिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव मंदिर में जल के साथ दुग्ध तथा पंचामृत से अभिषेक अवश्य करना चाहिए।

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हरियाली अमावस्या के दिन क्या नहीं करें?
What not to do on the day of Hariyali Amavasya?

अमा‍वस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं।

ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।

बिहार में इस दिन अधिकतर लोग उपवास करते हैं।

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अन्य जानकारी के लिए हमारे पण्डित जी से सम्पर्क करें –
Astrologer Neelmani Shastri – 7891-1008-11

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