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Krishna Janmashtami Date 2021 | कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कब है

भारत में प्रतिवर्ष अनेकों पर्व मनाए जाते है। सभी त्यौहारों का बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। होली से लेकर दिवाली तक सभी त्यौहारों में बड़ी धूम रहती है। ऐसा ही एक पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसे श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। ये उत्सव भगवान श्री कृष्ण (Shree Krishna Janmashthmi) के जन्म के उपलक्ष्य में द्वापरयुग से निरंतर सनातनियो द्वारा मनाए जाने वाला पर्व है । चलिए जानते है कि जन्माष्टमी पर्व के बारे में विस्तृत रूप से (Krishna Janmashtami Date 2021)-

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Radha Krishna

Table of Contents

कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?
Why is Krishna Janmashtami celebrated?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को भारत देश में एक महोत्सव के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पंडित अभिषेक शर्मा (Pt. Abhishek Sharma) ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण ने माता देवकी की कोख से जन्म लिया था, इस कारण से इस दिन को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाते है।

2021 में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी?
Krishna Janmashtami Date 2021?

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलमणि शास्त्री (Astrologer Neelmani Shastri) ने बताया कि हर साल जन्माष्टमी का त्यौहार भाद्रपद माह की कृष्णा पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस वर्ष 2021 जन्माष्टमी का पर्व (Krishna Janmashtami Date 2021) स्मार्त के लिए 29 अगस्त 2021 को तथा वैष्णव के लिए 30 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा।

29 अगस्त 2021 को अष्ठमी का प्रवेश होगा। इसी कारण से स्मार्त जन 29 अगस्त को जन्माष्ठमी (Krishna Janmashtami Date 2021) का उत्सव मनाएंगे।
लेकिन 30 अगस्त 2021 को सूर्योदय काल में अष्ठमी होने और निशीथ काल मे रोहिणी नक्षत्र होने से इसी दिन वैष्णव जन भगवान श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव मनाएंगे।

2021 में जन्माष्टमी का शुभ महूर्त –
Auspicious time for Janmashtami in 2021 and Krishna Janmashtami Date 2021-

जन्माष्टमी 2021 का शुभ मुहूर्त व्रत को खोलने के लिए और भगवन श्री कृष्णा की पूजा के लिए अति महत्वपूर्ण है।
निशिथ पूजा मुहूर्त – रात्रि 11:59:27 से 12:44:18 तक रहेगा और इसकी अवधि लगभग 44 मिनट रहेगी।

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जन्माष्टमी का पारण कितने बजे है?
What time is Janmashtami’s Parana?

पारणा मुहूर्त- 31 अगस्त 2021 को 5 बजकर 57 मिनट के बाद।

जन्माष्टमी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?
How is the festival of Janmashtami celebrated?

इस दिन लगभग, हिन्दू धर्म के सभी लोग जन्माष्टमी का व्रत रखते है। ज्योतिषाचार्य पंडित नीलेश शास्त्री (Astrologer Nilesh Shastri) ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का अर्ध रात्रि को जन्म होने के कारण यह व्रत मध्य रात्रि में 12 बजे तक रखा जाता है। जन्माष्टमी पर्व को बहुत ही धूम-धाम से पूरे देश में मनाया जाता है। गावों शहरों में मेले आदि का आयोजन होता है। व्रत का पालन करने वाले सभी भक्तजन पूरे दिन भगवान के भजन गाते है और पूजा पाठ आदि करते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सभी लोग आनन्द पूर्वक व्रत रखते हैं। भगवान को भोग लगाने व जन्मोत्सव मानने के लिए लोग विभिन्न प्रकार की मिठाइयां, नए कपड़े तथा घर मे सजावट के समान खरीदते हैं और भगवान का श्रृंगार करते हैं।

शास्त्री अभिषेक शर्मा के अनुसार घरों, मंदिरों आदि में प्रात:काल से लेकर मध्य रात्रि तक भगवान श्री कृष्ण का गुणगान किया जाता है। छोटे बच्चों को बालगोपाल के रूप में सजाया जाता है तथा झांकियां निकाली जाती है। बालगोपाल को झूले में बैठा कर झुलाया जाता है और पूजा अर्चना की जाती है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कथा व इतिहास
History and Story of Shri Krishna Janmashtami

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में अत्याचारी कंस की नगरी मथुरा के कारागाह में कंस के वध एवं दुष्टों के विनाश के लिए हुआ था। इनका जन्म वसुदेव जी की आठवीं सन्तान के रूप में हुआ।

श्रीकृष्ण के जन्म के लिए कहा जाता है कि कंस को स्वपन में भविष्यवाणी हुई कि उनकी सबसे प्रिय बहन देवकी की आठवीं संतान उसके वध का कारण बनेगी। तत्पश्चात इस भविष्यवाणी का स्मरण रखते हुए उसने अपनी बहन देवकी को उनके पति सहित बंदी – गृह में डाल दिया और जब भी देवकी की कोई भी संतान जन्म लेती तो कंस उसका वध कर देता था। ऐसे कर-कर के उसने देवकी – वासुदेव की सात पुत्रिओं का वध कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के अवतार रूप में माता देवकी के गर्भ से आठवीं सन्तान के रूप में जन्म लिया और साथ ही माँ जगदम्बा का जन्म नन्दबाबा के यहाँ यशोदा जी के गर्भ से हुआ। जिसके कंस द्वारा 52 टुकड़े कर दिए गए, जो की वर्तमान में 52 शक्ति पीठों के रूप में पूजनीय है। इस कारण से वह इस कार्य में असफल रहा और यही उसके वध का कारण बना।

आखिर में श्री कृष्ण ने कंस का अंत कर पूरी प्रजा को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के अनेक कारण रहे है। इस संसार मे सभी का उद्धार करने के लिए भगवान जन्म लेते रहते है ।

जन्माष्टमी का व्रत या उपवास कैसे करना चाहिए?
How to fast on Janmashtami?

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलेश शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्योत्सव पर भाद्रपद की कृष्ण पक्ष अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दिन व्रत या उपवास किया जाता है। इस व्रत में शाकाहार किया जाता है। जन्माष्टमी के पूरे दिन सुबह से पूजा, आराधना, ध्यान, भजन व कीर्तन आदि करने चाहिए।
किसी भी प्रकार का भोजन, अन्न ग्रहण, फलाहार, धूम्रपान आदि निषेध होता है। मध्य रात्रि भगवान को भोग लगाते है और इसके बाद व्रत खोलते हैं।

भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उपवास पूर्ण श्रद्धा भक्ति के साथ किया जाता है। इस दिन सूर्योदय पूर्व से ही स्नान करके भगवान श्री कृष्ण को स्नान आदि श्रृंगार करके ठाकुर जी को भोग लगाना चाहिए। उपवासी को अन्न  ग्रहण नहीं करना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलमणि शास्त्री ने बताया कि पूरे दिन भगवान श्री कृष्ण की भक्ति लीन रहे। गोपाल सहस्रनाम के पाठ ओर मन्त्र जाप में ही दिन को पूर्ण करना चाहिये।सन्ध्या के समय ठाकुर जी की आरती कर विशेष श्रृंगार करना चाहिए। इसके बाद मध्य रात्रि 12 बजे से ठाकुर जी का पंचामृत से पंचगव्य से अभिषेक कर पिले वस्त्र धारण करवाना चाहिए और फिर फल आदि का भोग लगाकर उपवास को पूर्ण करने का विधान है ।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व –
Significance of Shri Krishna Janmashtami

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलमणि शास्त्री ने बताया कि इस दिन सच्चे मन और श्रद्धापूर्वक व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कमजोर चंद्रमा वाले अगर इस दिन विशेष पूजा करते हैं तो उन्हें फल की प्राप्ति होती है। जन्माष्टमी का व्रत करने से संतान प्राप्ति के साथ-साथ दीर्घायु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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ज्योतिषाचार्य नीलमणि शास्त्री के अनुसार सन्तान की इच्छा रखने वाले दम्पतियों को भगवान श्री कृष्ण को माखन ओर मिश्री का भोग लगाना चाहिए ।
साथ ही विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सन्तान गोपाल स्तोत्र के पाठ अवश्य करवाना चाहिए ।
व्यापार में वृद्धि चाहने वाले व्यक्तियों को भगवान श्री कृष्ण को शहद और गाय के दूध युक्त मिठाई का भोग लगाकर गोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्र के पाठ ब्राह्मणों द्वारा करवाना चाहिए ।
विवाह की इच्छा रखने वाले युवकों को भगवान श्री कृष्ण का विशेष मन्त्र का जाप ओर गाय के दूध और छैना से बनी मिठाई को भोग लगाना चाहिए
विवाह की इच्छा रखने वाली युवतियों को भगवान श्री कृष्ण का विशेष मन्त्र का जाप ओर केले और घी से बनी मिठाई को भोग लगाना चाहिए ।
साथ ही भगवान श्री कृष्ण को मोर पंखी से अर्चन करना चाहिए ।

जन्माष्टमी के व्रत में क्या खा सकते हैं?
What can we eat during Janmashtami fast?

यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस व्रत को करने के लिए निराहार रहना होता है। सूर्योदय से अर्धरात्रि तक भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
इस व्रत में दिन में पेय पदार्थों का ही सेवन किया जाना चाहिए। इनमें जल, नींबू पानी या सिकंजी (बिना नमक वाली) पी सकते हैं।
इसके अलावा रात्रि में व्रत खोलने के लिए दूध से बनी मिठाई, कुट्टू, रामदाना, सिंघाड़ा आदि के आटे से बनी मिठाई, पकोड़ी, पूरी, साबुदाने की खीर, खिचड़ी, सूखे मेवे, आलू से बनी वस्तु या मिठाई, धनिया पंजीरी, दूध, दही, तुलसी के पत्ते, फल आदि का सेवन कर सकते हैं।

जन्माष्टमी के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
What should not be eaten during Janmashtami fast?

इस पावन व्रत में लहसुन, प्याज, नमक, अन्न जैसे गेंहू, बाजरा, मक्का आदि से निर्मित वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। ये सभी खाद्य पदार्थ शाकाहार में नहीं आते हैं।

प्रान्तों की जन्माष्ठमी

राधाकृष्ण भक्ति सम्पूर्ण संसार मे है और इसी के चलते विदेशों में भी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। उत्तर भारत से प्रारम्भ ये भक्ति भाव का रस सम्पूर्ण संसार को आनंदित कर रहा है ।

जयपुर और करौली (राजस्थान)

राजस्थान में गोविन्द नगरी जयपुर में अनेक स्थानों पर हर्षोल्लास के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है और गोविन्द देव जी को मध्यरात्रि पर पञ्चाङ्ग श्रवण करवाने की परंपरा वर्षो से चली आ रही है। जयपुर के महाराजा श्री सवाई जयसिंह जी के कुलदेव इष्ट देव श्री राधा गोविन्द देवजी ही है। जन्मोत्सव के दूसरे दिन मध्यान्ह में नन्दोत्सव मनाया जाता है, जिसमे भक्तों को मिश्री, माखन, मिठाई, वस्त्र, अलंकार आदि उछाल किये जाते है । राजस्थान में वैसे तो बहुत से मंदिर है लेकिन 3 विशेष मंदिर बताये है। जयपुर में राधा गोविन्द देव जी, विजय गोविन्द देव जी और करौली जनपद के मदन मोहन जी का मंदिर

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वृंदावन (उत्तर प्रदेश)

इसी प्रकार वृन्दावन में बांके बिहारी जी के यहां भक्तों भीड़ लगी रहती है और जगमोहन में भक्तो का प्रवेश नही रखा जाता है। गर्भगृह ओर जगमोहन प्रांगण में केवल पुजारी और समिति के सदस्यों को ही प्रवेश की आज्ञा होती है । श्री बांके बिहारी जी के यहां थोड़ी थोड़ी देर में ठाकुर जी के सामने पर्दा लगाया जाता है। एक मान्यता है कि ठाकुर श्री बांके बिहारी जी ने अगर किसी भक्त से नजऱ मिला ली तब से ही ठाकुर जी उनके साथ चले जायेंगे। इसीलिए बार बार पर्दा लगाया जाता है। वृन्दावन में राधामोहन राधावल्लभ जी टटिया स्थान पर मोह्निबिहारी जी के दर्शन भी बड़े दुर्लभ होते है। इस दिन यहां पर रात्रि के मध्य में ठाकुर जी का पंचामृत से अभिषेक कर मंगलावस्त्र पीताम्बर धारण करवाया जाता है ।

द्वारिकाधीश (गुजरात)

जन्मस्थली श्री मथुरा जी, गोवर्धन जी, बरसाना जी, श्रीकृष्णमठ उडुपी, श्रीरंगजी यहां पर भी हर्षोल्लास से कंस ने मथुरा के राजा अपने पिता उग्रसेन से उनका राज्य छीनकर अपने अधीन कर लिया तथा स्वयं शासक बनकर आत्याचार करने लगा। एक भविष्यवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवाँ पुत्र उसके विनाश का कारण होगा।

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Astrologer Neelmani, Nilesh and Abhishek
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