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पीलू का परिचय
Introduction to Peelu in Hindi

पीलू (Benefits of Miswak or Peelu) एक विशालकाय घना कांटेदार वृक्ष है। पीलू का वृक्ष बहुत की कम देखने को मिलता है, किंतु यह बहुत ही उपयोगी पेड़ होता है। भारत में बहुत से लोग पीलू को पीलु या पीला आदि नामों से पुकारते हैं। पीलू में आने वाला फल मीठा, रसीला और बहुत ही स्वादिष्ट होता है। कुछ लोग पीलू के वृक्ष के डंठल का दातुन के लिए प्रयोग करते हैं।

राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाया जाने वाला पेड़ पीलू जिसे स्थानीय भाषा में जाल (Benefits of Miswak or Peelu) के नाम से भी जाना जाता है। इसी जाल के पेड़ पर छोटे छोटे रसीले पीलू के फल लगते हैं। यह फल मई व जून तथा हिन्दी के ज्येष्ठ व आधे आषाढ़ माह में लगते हैं। इसकी विशेषता यह है कि रेगिस्तान में जितनी अधिक गर्मी और तेज़ लू चलेगी पीलू उतने ही रसीले व मीठे होंगे। लू के प्रभाव को कम करने के लिए यह एक रामबाण औषधि मानी जाती है।

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Miswak or peelu

आयुर्वेद में औषधि के रूप में भी पीलू का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग अनेकों रोगों जैसे उदर रोग, पथरी, बवासीर, दांत विकार, वात्त, पित्त और कफ दोष, सिर दर्द, कुष्ठ रोग, मधुमेह में किया जाता है। इसकी जड़ की छाल से शारीरिक कमजोरी और मानसिक विकार दूर करने में सहायक होता है।

आइए जानते हैं कि पीलू से मिलने वाले फायदे (Benefits of Miswak or Peelu) के बारे में –

पीलू क्या है?
What is Miswak (Peelu)?

(Miswak tree) पीलू का वृक्ष 3-4 मीटर ऊँचा होता है। यह दो प्रकार की प्रजाति का होता है। इसकी शाखाएं कमजोर और नीचे की ओर झुकी हुई होती हैं। इसकी डालियां आकार में छोटी और रंग में सदैव हरी रहती हैं। पीलू 3 मिमी व्यास का गोल, झिल्लीदार चिकना फल होता है। ये कच्चा हरे रंग का और पकने पर लाल रंग का चमकदार तथा रस से भरा होता है। प्रत्येक फल में एक बीज होता है। इस फल को मसलने से तेज गन्ध आती है।

पीलू के फल कितने तरह के होते हैं?

पीलू दो तरह का होता है। एक छोटा पीलू और दूसरा बड़ा पीलू।

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पीलू के अन्य भाषाओं में नाम
Meswak Names in Different Languages

पीलू Salvadoraceae (सैल्वैडोरेसी) कुल का वृक्ष है जिसका वानस्पतिक नाम Salvadora persica Linn. (सैल्वेडोरा पर्सिका) Syn-Salvadora indica Wight है। इसका अलावा पीलू को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है, जो ये हैंः-

Meswak or Peelu in Hindi – पीलू (Peelu), छोटा पीलू (Chhota Peelu), खरजाल (Kharjal)

अंग्रेजी में पीलू का नाम –
मेसवाक (Meswak), साल्ट बुश ट्री (Salt bush tree), मस्टर्ड ट्री (Mustard tree), Tooth brush tree (टूथ ब्रश ट्री)

Peelu in Sanskrit – पीलू (Peelu) , पीलू, गुडफल (Good Fal), शीतफल (Sheetfal), गौली (Gauli), सहस्राक्षी (Sahastrakshi), करभवल्लभ (Karvallabha), पीलूक (Peeluk)

Urdu – पीलू (Pilu)

Gujarati – पीलू (Pilu), खरि जाल (Khari jal)

Tamil – पेरुन्गोलि (Perungoli), कलावी (Kalavi)

Telugu – गोगु (Gogu), गुनिया (Gunia)

Bengali – पीलूगाछ (Pilugach), पीलू (Pilu)

Punjabi – पीलू (Pilu), झाल (Jhal)

Marathi – पीलू (Pilu), खाकिन (Khakin)

Malayalam – उका (Uka)

Arabic – अराक (Arak), मिसवाक (Miswaq)

पीलू के उपयोगी भाग
Beneficial Part of Peelu or Miswak in Hindi

पत्ते (Leaf of Miswak)

फूल (Flower of Miswak)

तना (Trunk of Miswak)

फल (Fruits of Miswak)

जड़ (Root of Miswak)

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Miswak Tree

पीलू कहां पाया या उगाया जाता है?
Where is Peelu Found or Grown?

यह भारत के राजस्थान, बिहार, कर्नाटक, सिंध आदि शुष्क प्रदेशों में पाया जाता है। यह रेतीले स्थानों पर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। रेगिस्तान में पीलू को देसी अंगूर भी कहा जाता है।

पीलू के औषधीय गुण
Health Benefits and Uses of Meswak in Hindi

मुँह के छाले में पीलू के फायदे
Health Benefits of Meswak in Cure Mouth Ulcer in Hindi

पीलू के फल स्वाद में बहुत ही स्वादिष्ट होता है। यह छालों के लिए कारगर साबित हो सकता है। इसको खाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

मुख रोग में पीलू के फायदे
Peelu or Meswak Benefits in Oral Disease Treatment in Hindi

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जिन लोगों के मुंह से दुर्गंध आती है या मसूड़ों में सड़न जैसा लगता है, उनको इससे निजात पाने के लिए पीलू का प्रयोग करना चाहिए। पीलू की लकड़ी से दातून करने से दांत तथा मसूड़े मजबूत होते हैं और मुंह से आने वाली बदबू भी खत्म होती है।

सांस की बीमारी में पीलू के फायदे
Health Benefits of Peelu in Respiratory Disease in Hindi

पीलू के पत्तोंं का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में सेवन करने से सांस का फूलना, दमा और खांसी आदि रोग में लाभ मिलता है।

सफेद दाग में पीलू से लाभ
Health Benefits of Peelu in Cure Leucoderma in Hindi

नीम, पीलू, अमलतास के पत्ते, वायविडंग, कनेर बीज, तिल्वक, हरिद्रा, दारुहरिद्रा, लघु तथा बड़ी कटेरी को जल में पीस लें। इसका लेप सफेद दाग पर नियमित रूप से करने से सफेद जल्द खत्म हो जाते हैं।

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घाव में पीलू से फायदा
Benefits of Peelu in Burn Healing in Hindi

आग से जलने पर पीलू के पत्तों को पीसकर लेप करने से शीघ्र लाभ मिलता है।

पीलू के पत्तों को पीसकर घाव के ऊपर लगाने से घाव में मवाद नहीं बनती है तथा घाव जल्दी भर जाते हैं।

शारीरिक कमजोरी में पीलू के प्रयोग से लाभ
Health Benefits of Miswak or Peelu to Treat of Body Weakness in Hindi

पीलू के फलों का सेवन करने से पित्त दोष, शुक्राणु विकार, कफ एवं वात दोष आदि रोगों में फायदा होता है।

उदर रोग में पीलू के फायदे
Health Benefits of Peelu in Stomach Disease in Hindi

पीलू के फल को भून कर सेंधा नमक के साथ खाएं और इसके साथ में गोमूत्र, दूध या अंगूर का रस का सेवन करने से पेट में गैस की समस्या से निजात मिलती है।

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आफरा आने पर पीलू के फायदे
Benefits of Peelu in Flatulence in Hindi

पीलू के पेस्ट से पकाए हुए घी का सेवन करने से पेट के फूलने की समस्या में लाभ होता है।

बवासीर में पीलू के फायदे
Benefits of Miswak (Peelu) in Piles Treatment in Hindi

पीलू का अकेले या छाछ के साथ प्रतिदिन एक सप्ताह नियमित रूप से सेवन करने से बवासीर में लाभ मिलता है। इसका सेवन करने से बवासीर, पेट की गैस, पाचन विकार, गुदा विकार आदि रोगों में भी आराम मिलता है।

पीलू के तेल में बत्ती भिगोकर गुदा में रखने से बवासीर में आराम मिलता है।

मूत्र रोग में पीलू के फायदे
Benefits of Peelu in Treat Urinary Disease in Hindi

पीलू के पके हुए फलों का काढ़ा बनाकर 20-30 मिली मात्रा में सेवन करने से मूत्र विकार ठीक होते हैं।

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गठिया रोग में पीलू के फायदे
Health Benefits of Peelu in Arthritis Treatment in Hindi

शतावरी जड़, रास्ना, बलाजड, दशजड़, पीलू फल, काली निशोथ, अरंडी जड़ तथा शालपर्णी के घोल को दूध में पका कर सेवन करने से गठिया रोग में लाभ मिलता है।

निर्गुण्डी के पत्तोंं और पीलू के पत्तों को समान मात्रा में लेकर महीन पीसकर जोड़ों पर दर्द वाले स्थान पर बांधने से जोड़ों के दर्द का ठीक हो जाता है।

पीलू बीज के तेल से मालिश करने से जोड़ों का दर्द में आराम मिलता है।

शरीर के दर्द में पीलू के फायदे
Benefits of Peelu to Cures Body Pain in Hindi

जैतून के तेल में पीलू के पत्तों को पकाकर छान लें। इस तेल की शरीर पर मालिश करने से दर्द में आराम मिलता है।

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