Mahashivratri Vrat | महाशिवरात्रि व्रत, कथा और महत्व

शिवरात्रि पर्व क्यों मनाया जाता है?
Why celebrate Mahashivratri Vrat festival?

यह वह पावन दिन है जिस दिन शिव भक्त अपने भोलेनाथ और देवी पार्वती की प्रसन्नता और उनका आशीर्वाद पाने के लिए व्रत (Mahashivratri Vrat) रखकर इनकी पूजा करेंगे। पुराणों में ऐसी कथा मिलती है कि पूर्वजन्म में कुबेर ने अनजाने में ही महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की उपासना कर ली थी, जिससे उन्हें अगले जन्म में शिव भक्ति की प्राप्ति हुई और वह देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।

महाशिव रात्रि कब मनाई जाती है?
When Mahashivratri Vrat celebrate?

महाशिवरात्रि के पावन दिन के बारे में कहा जाता है कि यूं तो साल में हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि आती है, जिसे मास शिवरात्रि कहते हैं। उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी और गुजरात, महाराष्ट्र के पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी सबसे श्रेष्ठ है। इसलिए इसे शिवरात्रि नहीं, बल्कि महाशिवरात्रि कहते हैं। इसकी वजह यह है कि इसी दिन प्रकृति को धारण करने वाली देवी पार्वती और पुरुष रूपी महादेव का गठबंधन यानी विवाह हुआ था।

महाशिव रात्रि 2021 कब मनाई जाएगी?
Mahashivaratri When will be celebrated?

इस वर्ष 11 मार्च को दिन में 2 बजकर 40 मिनट से चतुर्दशी तिथि लगेगी, जो मध्यरात्रि में भी रहेगी और 12 तारीख को दिन में 3 बजकर 3 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए 12 तारीख को उदय कालीन चतुर्थी होने पर भी 11 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।

महाशिवरात्रि व्रत के विधि विधान
Mahashivratri Vrat karne ke Vidhi Vidhan

भगवान शिव का प्रिय पुष्प आक व धतूरा का फूल है। किंतु भगवान शिव सामान्य फूल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। बस भाव होना चाहिए। इस व्रत को जनसाधारण स्त्री-पुरुष, बच्चा, युवा और वृद्ध सभी करते है। धनवान हो या निर्धन, श्रद्धालु अपने सामर्थ्य के अनुसार इस दिन रुद्राभिषेक, यज्ञ और पूजन करते हैं। भाव से भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने का हर संभव प्रयास करते हैं।

महाशिवरात्रि का ये महाव्रत हमें प्रदोष निशीथ काल में ही करना चाहिए। जो व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण विधि-विधान से करने में असमर्थ हो, उन्हें रात्रि के प्रारम्भ में तथा अर्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन अवश्य करना चाहिए।

शिवपुराण के अनुसार व्रत करने वाले को महाशिवरात्रि के दिन प्रात:काल उठकर स्नान व नित्यकर्म से निवृत्त होकर ललाट पर भस्म का त्रिपुण्ड तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला धारण कर शिवालय में जाना चाहिए और शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं भगवान शिव को प्रणाम करना चाहिए। तत्पश्चात उसे श्रद्धापूर्वक महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प करना चाहिए।

शिवालय में भगवान शिव (शिवलिंग) की पूजा की जाती है। शिवलिंग के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिक, नंदी की भी पूजा की जाती है।

पूजा व व्रत के लिए क्या करें?
What to do for worship and fast?

भगवान शिव की पूजा के लिए शुद्ध जल, ताजा दूध, दही, घी, शक्कर या बूरा, शहद के साथ बेर, आक के फूल, धातुरा, विल्व पत्र, पुष्प माला, दुर्वा, कर्पूर, फल, गाजर, शकरकंद, श्रीफल (नारियल), मिठाई या गाजर का हलवा, कुमकुम या चंदन, धूप या घी का दीपक आदि होना चाहिए।

शिवलिंग की पूजा करते समय मंत्र जाप
Shivling ki Pooja karne ke liye Matra

पंडित नीलमणि जी बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा करते समय व अभिषेक करते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। इसके अलावा भगवान शिव चालीसा का जाप करना चाहिए।

महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके दूध से स्नान व ॐ ओम हीं ईशानाय नम: का जाप करना चाहिए।

द्वितीय प्रहर में दधि स्नान करके ॐ ओम हीं अधोराय नम: का जाप करना चाहिए।

तृतीय प्रहर में घृत स्नान एवं मंत्र ॐ ओम हीं वामदेवाय नम: मंत्र का जप करना चाहिए।

चतुर्थ प्रहर में मधु स्नान एवं ॐ ओम हीं सद्योजाताय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

महाशिवरात्रि पर शिवयोग
Mahashivratri par Shivyog

पंडित नीलमणि के अनुसार
11 मार्च महाशिवरात्रि के दिन का पंचांग देखने से मालूम होता है कि इस दिन का आरंभ शिवयोग में होता है जिसे शिव आराधना के लिए शुभ माना गया है। शिवयोग में गुरुमंत्र और पूजन का संकल्प लेना भी शुभ कहा गया है। लेकिन शिवयोग 11 मार्च को अधिक समय तक नहीं रहेगा सुबह 9 बजकर 24 मिनट पर ही यह समाप्त हो जाएगा और सिद्ध योग आरंभ हो जाएगा।

सिद्ध योग को मंत्र साधना, जप, ध्यान के लिए शुभ फलदायी माना जाता है। इस योग में किसी नई चीज को सीखने या काम को आरंभ करने के लिए श्रेष्ठ कहा गया है।

ऐसे में सिद्ध योग में मध्य रात्रि में शिवजी के मंत्रों का जप उत्तम फलदायी होगा।

महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त कब है?
When is Maha Shivaratri auspicious time?

चतुर्दशी आरंभ 11 मार्च : 2 बजकर 40 मिनट
चतुर्दशी समाप्त 12 मार्च : 3 बजकर 3 मिनट
निशीथ काल 11 मार्च मध्य रात्रि के बाद 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक।
शिवयोग 11 मार्च सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक
सिद्ध योग 9 बजकर 25 मिनट से अगले दिन 8 बजकर 25 मिनट तक
धनिष्ठा नक्षत्र रात 9 बजकर 45 मिनट तक उपरांत शतभिषा नक्षत्र

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महाशिवरात्रि का महत्व –
Importance of Maha Shivaratri

पंचक आरंभ 11 मार्च सुबह 9 बजकर 21 मिनट से
महाशिवरात्रि पर पूजा का समय गृहस्थ और साधकों के लिए

महाशिवरात्रि के अवसर पर तंत्र, मंत्र साधना, तांत्रिक पूजा, रुद्राभिषेक करने के लिए 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक का समय श्रेष्ठ रहेगा।

सामान्य गृहस्थ को शुभ और मनोकामना पूर्ति के लिए सुबह और संध्या काल में शिव की आराधना करनी चाहिए।

2 बजककर 40 मिनट से चतुर्दशी लग जाने से दोपहर बाद भगवान शिव जी की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।

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