साल की अंतिम अमावस्या

धर्म शास्त्र के अनुसार फाल्गुन (Falgun) मास के कृष्ण पक्ष (Krishna Paksh) की अमावस्या का विशेष महत्व है। इस वर्ष यह तिथि 13 मार्च 2021 को आ रही है। शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का योग बन रहा है। मीन राशि में चंद्रमा (Moon) और साध्य योग रहेगा। यह इस संवत् की अंतिम शनि अमावस्या रहेगी। इसके बाद 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या का योग बन रहा है।

अमावस्या का काल 12 मार्च दोपहर 3:00 बजे आरंभ हो कर 13 मार्च को दोपहर 4:00 बजे तक रहेगा। इस समय किसी प्रकार का शुभ कार्य नही किया जाता है।

शनि अमावस्या
Shani Amavasya in Hindi

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलेश शास्त्री ने बताया कि अमावस्या का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का योग बन रहा है। पितृ तर्पण शांति के लिए प्रति माह की अमावस्या को अपने पूर्वजों को भोग लगाना चाहिए। ब्राह्मण दंपति को भोजन करवाना पितरों के निमित्त दान करना चाहिए।

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शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ रहा है। पंडित नीलेश शास्त्री के अनुसार जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती ढैया या शनि का दोष है, उनको शनि के निमित्त दान करना चाहिए तथा काले कपड़े, लोहा, तेल आदि दान करने से शनि का दुष्प्रभाव समाप्त होता है, साथ ही प्रत्येक शनिवार को श्री सुंदरकांड (Sundar Kand) और प्रतिदिन हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) के कम से कम 11 पाठ करने से शनि का प्रकोप समाप्त हो जाता है और शनि देव शुभ फल देने लग जाते हैं।

शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ रहा है। पंडित नीलेश शास्त्री के अनुसार जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती ढैया या शनि का दोष है, उनको शनि के निमित्त दान करना चाहिए तथा काले कपड़े, लोहा, तेल आदि दान करने से शनि का दुष्प्रभाव समाप्त होता है, साथ ही प्रत्येक शनिवार को श्री सुंदरकांड (Sundar Kand) और प्रतिदिन हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) के कम से कम 11 पाठ करने से शनि का प्रकोप समाप्त हो जाता है और शनि देव शुभ फल देने लग जाते हैं।

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Astrologer Nilesh Shastri

 

By Admin

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