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Tinospora cordifolia Benefits – गिलोय एक वरदान

Table of Contents

गिलोय – एक परिचय
Introduction of Tinospora Cordifolia in Hindi

गिलोय (Tinospora cordifolia Benefits) एक आयुर्वेदिक रसायन है। गिलोय को ज्वर नाशक, गुडुची, अमृता (Amrita) अथवा अमृत वल्ली (amrut valli) के नाम से जाना जाता है। गिलोय की एक लता होती है जो कभी नहीं सूखती है या हमेशा गीली या हरी रहती है। बाहर से सूखी दिखने वाली गिलोय अंदर से गीली रहती है। गिलोय के पत्ते स्वाद में कड़वे एवं कसैले होते है।
यह वेल मुख्य रूप से नीम के पेड़ पर चढ़ाई जाती है, जिससे इसके गुणों में और भी वृद्धि हो जाती है। गिलोय के पत्ते पान के पत्ते के आकार में तथा इसका फल मटर के दाने जैसा होता है।
गिलोय एक चमत्कारिक आयुर्वेदिक औषधि है, यह पृथ्वी पर एक वरदान के रूप में है।
गिलोय से वात, कफ, पित्त, बुखार, पाचन क्रिया, नेत्र ज्योति आदि में मुख्य रूप से लिया जाता है। इसके अलावा गिलोय का प्रयोग जलन, मधुमेह (डायबिटीज), कुष्ठ रोग, पीलिया, वीर्य वृद्धि, बुद्धि वृद्धि, खांसी, बवासीर, टी.बी., मूत्र रोग एवं महिलाओं में शारीरिक कमजोरी, मनुष्य की इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर सिद्ध होती है।
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Tinospora cordifolia (Giloy)
यह औषधि शरीर के किसी भी हिस्से में उत्पन्न होने वाले कीटाणुओं का विनाश कर देती है और रोगों से हमारी रक्षा करती है।

गिलोय का प्रयोग एवं उपचार
Use and treatment by Tinospora Cordifolia

नेत्र रोग में गिलोय के फायदे  –
Benefits of Tinospora Cordifolia in eye disease in Hindi 

गिलोय आंखों के लिए बेहद लाभकारी औषधि है। गिलोय के तने का 4-5 इंच का टुकड़ा अच्छे से कूटकर त्रिफला के साथ काढ़ा बना ले और इसके बाद इसमें एक से दो चुटकी पीपली चूर्ण के साथ शहद मिलाकर इसका प्रतिदिन सेवन करना चाहिए। इसका रोज सेवन करने से आंखों की रोशनी में वृद्धि हो जाती है।

टी. बी. रोग में गिलोय के फायदे –
Health Benefits of Guduchi in T.B. disease in Hindi

गिलोय का तना या गिलोय का चूर्ण, अडूसा (वासा) के पत्ते या तना, अश्वगंधा, सतावर, दशमूल, बलामूल, पोहकरमूल और अतीस को बराबर मात्रा में लेकर अच्छे से कूट ले तथा इसे पानी में उबालने के लिए रख दें और इसका काढ़ा बना लें। एक कप काढ़ा सुबह शाम सेवन करने से टी. बी. जैसी खतरनाक बीमारी से छुटकारा मिल जाता है। इस काढ़े के बाद दूध का भी सेवन करना चाहिए जो लाभकारी रहता है।
 

कब्ज व अपच में गिलोय के फायदे –
Benefits of Giloy in constipation and indigestion in Hindi

गिलोय के रस के साथ गुड़ का सेवन करने कब्ज में लाभ मिलता है। यदि रस निकालने में समस्या हो तो गिलोय के तने को कूटकर चूसे और गुड़ का सेवन करें।
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कैंसर रोग में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora cordifolia in cancer disease in Hindi

गिलोय एक प्रकार से संजीवनी बूटी है। यह कैंसर जैसे रोग में भी लाभकारी है। एक बर्तन में या मिट्टी में गेहूं के दाने डालकर उन्हें उगा ले। जब 10-15 दिन में गेहूं बड़े हो जाए तो उनकी पत्तियों को काट ले और एक मोटी गिलोय का  2 से 2.5 फिट लंबा टुकड़ा गेहूं के पत्तों के साथ पानी डाल कर पीस लें। इसके बाद कपड़े से निचोड़ कर रस निकाल लें।
इस रस का प्रतिदिन सेवन करने से कैंसर जैसा खतरनाक रोग भी ठीक हो जाता है।

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हृदय रोग, दिल की बीमारी और छाती या सीने में दर्द में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora Cordifolia in Heart disease and Chest pain in Hindi

गुनगुने पानी में गिलोय काली मिर्च पीस कर डाल ले और उसका सेवन 10-15 दिन करने से हृदय, सीने से संबंधित रोगों में लाभ मिलता है। जिन लोगों के सीने में दर्द रहता है उनके लिए यह बेहद लाभकारी नुस्खा है।

कफ में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora Cordifolia in Cough treatment in Hindi

मौसम परिवर्तन के साथ साथ कई सारे रोग उत्पन्न हो जाते है। इसमें अधिकांशतः कफ खांसी होते है। कफ रोग के लिए गिलोय का शहद के साथ सेवन करना चाहिए। इससे कफ में लाभ मिलता है। 
 

बुखार या ज्वर में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora Cordifolia in fever in Hindi

गिलोय मुख्य रूप से बुखार में काम आता है। गिलोय को ज्वर नाशक के नाम से भी जाना जाता है।  बुखार के रोगी के लिए गिलोय अमृत समान होने कारण इसको अमृता के नाम से भी जाना जाता है। 

बुखार में प्रयोग करने की विधि –
How to use giloy in fever in hindi

  • ज्वर या बुखार के लिए गिलोय का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। काढ़ा पीने से बुखार 3 दिन में ठीक हो जाता है। काढ़ा बनाने की विधि निम्न लिंक द्वारा प्राप्त कर सकते है, जो पूर्व में दी गई पोस्ट है। 

और पढ़े- काढ़ा – एक संजीवनी

  • एक 2 से 2.5 फिट लंबी गिलोय का टुकड़ा कूटकर या 50 ग्राम गिलोय पाउडर एक गिलास पानी मिट्टी के बर्तन में डालकर रात भर के लिए रख दें। सुबह इसे अच्छे से मसलकर छान लें और इसको 2-2 छोटे चम्मच दिन में 3 बार पीने से पुराना बुखार भी ठीक हो जाता है।
  • 20 ग्राम गिलोय के रस को 1 ग्राम पिप्पली के चूर्ण और शहद के साथ सुबह शाम सेवन करने से बुखार, कफ, खांसी जुकाम ठीक हो जाता है।

और पढ़े- लिसोड़ा के फायदे

  • पित्त के कारण होने वाले बुखार को ठीक करने के लिए गिलोय को मिश्री के साथ चाटना चाहिए। गिलोय के टुकड़े को अच्छे से पीस ले या कूट लें और उसका रस निकाल लें। इसके बाद इसमें मिश्री डाले।
  • यदि बुखार तेज और गंभीर स्थिति में है तो गिलोय, नीम आंवले का काढ़ा बना लें। आधा कप काढ़े में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से बुखार नहीं होता है और जिसे तेज गंभीर स्थिति का बुखार है उसका बुखार भी ठीक हो जाता है।
  • बुखार के रोगी को गिलोय के पत्तों की सब्जी बनाकर खानी चाहिए। यह बुखार में लाभदायक है।
  • अडूसा या वासा, गिलोय को काढ़े के साथ पानी में उबाल कर ठंडा कर ले तथा शहद के साथ सेवन करें। इससे बुखार, सूखी खांसी, श्वास रोग ठीक हो जाते है।

और पढ़े – तुलसी के फायदे 

गिलोय दिलाये एसिडिटी से आराम –
Tinospora Cordifolia Provides Relief from Acidity in Hindi

गिलोय के रस का गुड़ एवं मिश्री के साथ सेवन करने से एसिडिटी में आराम मिलता है। 
गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर पीने से भी एसिडिटी में लाभ प्राप्त होता है।
अडूसा या वासा, गिलोय को काढ़े के साथ पानी में उबाल कर ठंडा कर ले तथा शहद के साथ सेवन करें। यह सूखी खांसी, दमा, श्वास रोग, बुखार एसिडिटी जैसे रोगों में लाभदायक है।
 

मूत्र रोग या रुक रुक कर पेशाब होना – 
Tinospora Cordifolia Benefits in Urinary disease or intermittent urination in Hindi

सामान्यतः यह बीमारी बुजुर्ग व्यक्तियों में पाई जाती है। जिन लोगों को रुक रुक पेशाब आने की समस्या है उन लोगों के लिए यह रामबाण औषधि है। गुडुची या गिलोय के 15-20 ग्राम रस में 2 ग्राम पाषाण भेद चूर्ण मिलाकर एक चम्मच शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से रुक रुक कर आने वाले पेशाब की बीमारी में बहुत लाभ होता है।
इसका लगातार 40 दिन सेवन करना बहुत ही लाभदायक होता है।

डायबिटीज़ या मधुमेह रोग में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora cordifolia in diabetes in Hindi

शहद के साथ गिलोय का रस दिन में दिन में दो से तीन बार पीने से मधुमेह में लाभ मिलता है। मधुमेह के कारण होने वाले बुखार टायफायड में गिलोय का रस पीना लाभदायक रहता है।
 

बवासीर या मस्सा रोग में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora cordifolia in hemorrhoids or wart disease in Hindi

गिलोय, हरड़ धनिया को समान मात्रा में लेकर 500 मि.ली. पानी में उबाल लें तथा इसका काढ़ा बना लें। जब यह 100 से 150 मी. ली. ग्राम रह जाए तो इसमें देशी गुड़ डालकर सुबह शाम पिए। इस काढ़े को पीने से बवासीर या मस्से में आराम मिलता है।
 

पीलिया रोग में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora cordifolia in jaundice disease in Hindi

गिलोय के आधा कप काढ़े में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है। पीलिया के मरीज को इसका प्रतिदिन दिन में 3-4 बार सेवन करना चाहिए।
गिलोय के पत्तों को पीस कर एक गिलास छाछ में मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
इसके अलावा गिलोय की लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े करके उसकी माला पहनने से भी पीलिया में आराम मिलता है।
 

गठिया व जोड़ो के दर्द में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora cordifolia in arthritis and joint pain in Hindi

गिलोय का सौंठ के साथ सेवन करने से जोड़ो का दर्द ठीक हो जाता है। इसके लिए गिलोय का रस, चूर्ण या काढ़ा का प्रयोग कर सकते है। जोड़ो या गठिया दर्द के लिए आधा चम्मच सौंठ को 10-20 ग्राम गिलोय रस के साथ सेवन करे। इसका प्रतिदिन सुबह शाम सेवन करना अधिक लाभकारी होता है।
 

हाथीपांव रोग में गिलोय के फायदे –
Benefits of Giloy in Hathipaon Disease in Hindi

गिलोय के रस में डेढ़ से दोगुना सरसों तेल मिलाकर सुबह शाम खाली पेट पीने से हाथीपांव रोग ठीक हो जाता है।
 

कुष्ठ रोग या कोढ़ की बीमारी में गिलोय के फायदे –
Benefits of Tinospora Cordifolia in leprosy in Hindi

इस बीमारी में गिलोय का रस रोज पिलाना चाहिए। इस रोग में गिलोय का सेवन अधिक समय करना पड़ता है इसलिए लगातार 2-3 महीनों तक पीना चाहिए। 

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