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विक्रम संवत 2078
Vikram Samvat 2078

अंग्रेजी सभ्यता के कारण भारतवर्ष में नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है। कई लोग अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार नववर्ष मनाते हैं। लेकिन हिंदू धर्म चैत्र माह (Vikram Samvat 2078) के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नववर्ष मनाता है। इस तिथि से हिन्दी वर्ष के नए पंचांग प्रारंभ होते हैं और वर्ष भर के पर्व, उत्सव और अनुष्ठानों के शुभ मुहूर्त निश्चित होते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह को नवग्रह का राजा ज्योतिष का अधिपति माना जाता है। इस बार नवसंवत्सर 2078 (Vikram Samvat 2078) में राक्षस नाम संवत्सर 13 अप्रैल 2021 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार सूर्य उदय प्रातः 06:08 से नवसंवत्सर आरंभ होगी।

सम्वत 2078 का नाम राक्षस संवत्सर
Samvat 2078 is the name of the demon Samvatsar

राक्षस नाम संवत्सर में मानव मात्र में दीर्घकालीन विचार उत्पन होगा सामाजिक दूरी बढ़ सकती है, युवाओं में बेरोजगारी, प्रतिहिंसात्मक, लूटपाट, चोरी व डकैती की घटनाएं अधिक हो सकती हैं।
अतिवृष्टि व अल्पवृष्टि से फसलों को लाभ नहीं होगा। प्रजा में रोग पीड़ा में वृद्धि से जनहानि होगी व महंगाई का वातावरण बनेगा।

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Hindu Nav Varsh

किसको क्या मिला पद

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलेश शास्त्री ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र के सेनापति भूमिपुत्र मंगल ग्रह वर्षाधिराजभार को संभालने जा रहे हैं। मंत्री पद भी मंगल के पास ही रहेगा, नवग्रह में चंद को मंत्री माना जाता है। इस बार मंगल ग्रह को राजा मंत्री मेधेश का पद मिला है। न्यायधिपति शनि ग्रह को किसी प्रकार का पदभार नहीं संभालेंगे, वह मकर राशि में गोचर करेंगे। इस संवत में शनि ग्रह के साथ कुछ समय देवगुरु बृहस्पति भी वक्रीय अस्त रहेगें और इसके साथ ही शनि ग्रह नक्षत्र परिवर्तन भी करेंगे।

जैसे की पूर्व में बताया गया है ज्योतिष में सूर्य को राजा चंद्र को मंत्री ओर मंगल को सेनापति माना जाता है, इस संवत् 2078 का पंडित नीलेश शास्त्री के अनुसार

राजा मंगल
मंत्री मंगल
सस्येश ओर नीरसेश शुक्र
धान्येश बुध
मेधेश मंगल और चंद्र
रसेश सूर्य
फलेश चंद्र
धनेश गुरु
दुर्गेश चंद्र

शनि ग्रह को इस संवत् में किसी प्रकार का पद नहीं मिला है।

आने वाली संवत 2079 के राजा शनि देव होंगे।

संवत 2077 में शनि को रसेश का पद मिला था व इस संवत 2078 में शनि देव मकर राशि में विराजमान रहेंगे। यह वकीय मार्गी अस्त उदय भी होंगे।

मंगल के राज में अमंगल

ज्योतिषाचार्य पंडित नीलेश शास्त्री ने बताया कि

इस संवत में राजा मंत्री मंगल ग्रह और संवत् नाम राक्षस होने के कारण इस वर्ष ग्रह गोचर का इस प्रकार प्रभाव देखने को मिलेगा।

ग्रह गोचर का प्रभाव

संवत् 2078 में लूटपाट, चोरी व डकैती की घटनाएं अधिक हो सकती हैं।

बेरोजगारी बढ़ेगी, अस्त्र शस्त्र, वस्त्र का व्यापार कम होगा, व्यापार मंदा रहने की संभावना है।

वर्षा कहीं पर नहीं होगी तो कहीं अधिक होगी या कहीं पर कम होगी।

साथ ही प्रजा राजा का विरोध करती देखी जायेगी।

भूकंप, अग्निकांड, दुर्घटना बढ़ेगी, हवाई दुर्घटना और विदेशी संबंध कुछ समय के लिय लाभकारी नहीं होंगे।

रोग में वृद्धि होगी।
इस संवत्सर वर्ष में विद्वता, भय, उग्रता, राक्षसी प्रवृत्ति लोगों में पाई जाएगी।

संक्रामक रोगों से संपूर्ण देश प्रभावित रहेगा।

ग्रह गोचर

पंडित नीलमणि शास्त्री ने बताया कि

सम्वत 2078 का आरंभ 13 अप्रैल को प्रातः 06:08 मिनट पर होगा। ऐसे में सूर्य और बुध ग्रह लग्न में मीन राशि के साथ विराजमान रहेंगे। मेष राशि में वानी कुटम्ब के भाव में शुक्र चंद्र की युति रहेगी।
वृषभ राशि में पराक्रम परिश्रम भाव में संवत् के राजा मंत्री मंगल राहु के साथ युति कर रहे हैं।
वृश्चिक राशि में केतु ग्रह विराजमान है, यह भाग्यभाव में होने से अधिक लाभ नहीं रहेगा।
शनि ग्रह मकर राशि लाभ भाव में स्वग्रही विराजमान है और देवगुरु बृहस्पति व्यय भाव में होने से खर्चा अधिक बनेगा, लाभ कम रहेगा।

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